एक सामाजिक जागरूकता
इस मंगलवार को जब मैं मध्य प्रदेश के छतरपुर स्टेशन से बाहर निकल रहा था तो मैंने एक नया परिसर देखा जो पॉश तो लग रहा था लेकिन उसमें छोटा होटल और इसके बाद एक बड़ा सा मैरिज हॉल बना हुआ था जिज्ञासा वस मैंने पूछा कि इतने छोटे शहर में इतना बड़ा मैरिज हॉल क्यों है? तो मुझे तपाक से जवाब मिला कि इस शहर में अभिभावकों के बीच इस बात को लेकर अघोषित कड़ी होड़ है कि उनके बेटे या बेटी की शादी दूसरों से ज्यादा बड़ी और भव्य होनी चाहिए ! पता नहीं कि उस होटल के मालिक ने उसको गलत समझा या वास्तव में जो दिख रहा था वह सही है! शायद इसलिए वे ऐसी प्रॉपर्टी बना रहे हैं जिसका उद्देश्य उस जगह पर शादी हो जैसे बड़े आयोजन ज्यादा से ज्यादा कोशिश करना है
और अगर यह अंडर करेंट सही है तो मैं कहूंगा कि यह खतरे का संकेत है क्योंकि किसी भी शादी के मामले में हमने यही सीखा है कि हमारे बच्चों की शादी राजी खुशी से होनी चाहिए और निश्चित रूप से अच्छी सीख रही है नहीं है कि हम उनकी शादी में कितनी शान दिखाते हैं शादी के बारे में मेरी समझ यह है कि हम एक युवक और युवती के जीवन भर के गठबंधन को मान्यता प्रदान करते हैं यह एक ऐसी परंपरा है जो हमारे पूर्वजों के समय से चली आ रही है जब शादी का सर्टिफिकेट देने के लिए कोर्ट नहीं हुआ करती थी लेकिन एक निजी आयोजन में होड़ करना तो मुझे हजम होता है और ना ही उन लोगों को जो शादी को एक पारिवारिक आयोजन मारते हैं इन दिनों प्राइवेट शादियां ना सिर्फ मुंबई जैसे बड़े शहरों में बल्कि जबलपुर जैसे छोटे 3टीयर में भी होने लगी है
अब इसका दूसरा पास देखे तो हम ईरान द्वारा बच्चों की आलीशान शादियों पर आपत्ति इसलिए नहीं होनी चाहिए क्योंकि इसमें खर्च हुआ पैसा पिरामिड के निचले स्तर तक के आर्थिक स्थिति सुधारते हैं यानी अमीरों का पैसा ट्रैक्टर स्टंट लाइटिंग भंडार डिजाइनर जैसे सेवा देने वालों की कमाई का कारण बनता है लेकिन एक बड़े होटल को पूरा कॉन्ट्रैक्ट दे देने से इन लोगों तक पैसा ठीक ढंग से नहीं पहुंचता यह मेरी आपत्ति सिर्फ उन अभिभावकों ने ली है जो शादी में अपनी क्षमता से ज्यादा खर्च करते हैं
इसलिए संत रामपाल जी महाराज ने एक मुहिम चला रखी है कि जो उनका शिष्य बनेगा वह ना तो दहेज लेगा ना दहेज देगा और शादी भी उसी से करनी है जो संत रामपाल जी महाराज का शिष्य है तो वह अपने आप ना तो दहेज लेता है ना दे देता है ना तो कोई झंझट रहता है ना लड़ाई झगड़ा सिर्फ 17 मिनट की एक गुरुवाणी होती है जिसको रमणी कहते हैं और उसके बाद वधू वर की हो जाती है और एक सामान्य सा खाना घर में बनाया जाता है उसी खाने के साथ वधू को वर के साथ विदा किया जाता है और आने वाले बाराती भी उसी खाने को खाते है ना कोई तामझाम ना कोई दिखावा ।
इसलिए संत रामपाल जी महाराज द्वारा रचित पुस्तकें जीने की राह, ज्ञान गंगा ,गीता तेरा ज्ञान अमृत ,गहरी नजर गीता में ,रचित पुस्तकें हैं इनको एक बार जरूर निशुल्क मंगवा कर पढ़ें और उनका ज्ञान समझे कि वह आज समाज के लिए क्या कर रहे हैं और आज वह घर जेल में है तो किस वजह से हैं इसके बारे में आप एक बार जरुर पढ़ें
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